The information about different types of thullal in Malayalam language?

थुलल एक पारंपरिक केरल नृत्य रूप है जिसे विशेष रूप से कोट्टायम, अलप्पुझा, पतनमथिट्टा, कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जिलों में प्रदर्शित किया जाता है। यह भगवती या श्रीकृष्ण के इर्द-गिर्द घूमने वाले एक कथानक पर आधारित एक लोक नृत्य नाटिका है। थुलल मुखौटे, रंगीन वेशभूषा, संगीत और नृत्य के लिए जाना जाता है।

थुलल के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

* शास्त्रीय थुलल: यह थुलल का सबसे पारंपरिक रूप है और इसे संस्कृत में प्रस्तुत किया जाता है। शास्त्रीय थुलल में आमतौर पर भगवती या श्रीकृष्ण के बारे में एक पौराणिक कथा होती है।

* कथकली थुलल: यह थुलल का एक और पारंपरिक रूप है, लेकिन इसे मलयालम में प्रस्तुत किया जाता है। कथकली थुलल में आमतौर पर एक लोक कथा या पौराणिक कथा होती है।

* पदुक्का थुलल: यह थुलल का एक लोकप्रिय रूप है जो मंदिरों में प्रदर्शित किया जाता है। पदुक्का थुलल में आमतौर पर एक धार्मिक कहानी होती है।

* थिरुकुड़ा थुलल: यह थुलल का एक और लोकप्रिय रूप है जो केरल के उत्तरी जिलों में प्रदर्शित किया जाता है। थिरुकुड़ा थुलल में आमतौर पर एक हास्य कहानी होती है।

* वंची थुलल: यह थुलल का एक दुर्लभ रूप है जो केरल के दक्षिणी जिलों में प्रदर्शित किया जाता है। वंची थुलल में आमतौर पर एक ऐतिहासिक कहानी होती है।